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भाभी की चूत का दीवाना हो गया

Antarvasna, hindi sex kahani: पापा का ट्रांसफर हो चुका था और हम लोग अहमदाबाद आ गए थे अहमदाबाद में आने के बाद मैं नौकरी की तलाश में था और जल्द ही मुझे एक कंपनी में नौकरी मिल गई। हालांकि मेरी वहां पर तनख्वा तो ज्यादा नहीं थी लेकिन फिर भी मैं वहां पर जॉब कर रहा था और मैं अपनी जॉब से बहुत ही खुश था। मैं अपनी नौकरी से काफी खुश था और मेरी जिंदगी अच्छे से चल रही थी लेकिन जब मेरी जिंदगी में आशा आई तो मुझे लगा कि अब मेरी जिंदगी और भी अच्छे से चलने लगेगी। हम दोनों की मुलाकात मेरे ऑफिस के एक फ्रेंड ने करवाई जब हम दोनों की मुलाकात हुई तो उसके बाद हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। मुझे आशा का साथ पाकर अच्छा लगा और आशा को भी मेरा साथ अच्छा लगने लगा। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में हैं लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि आशा पैसो के पीछे इतनी लालची है कि वह मुझे धोखा दे देगी। आशा ने मुझे बहुत बड़ा धोखा दिया मैंने आशा के लिए ना जाने क्या कुछ नहीं किया लेकिन उसके बावजूद भी आशा ने मेरे प्यार को सिर्फ मजाक बनाकर रख दिया था। आशा मेरी जिंदगी से बहुत दूर जा चुकी थी आशा का कोई पता भी नहीं था कि वह कहां है। जाने से पहले जब एक बार मुझे आशा मिली थी तो मैंने उसे समझाया था कि तुम मेरे साथ ऐसा ना करो लेकिन आशा मेरी एक बात ना मानी और वह मेरी जिंदगी से काफी दूर जा चुकी थी मैं भी पूरी तरीके से टूट चुका था।

हमारे रिलेशन के बारे में सिर्फ हम दोनों को ही पता था आशा कभी चाहती ही नहीं थी कि हम दोनों का रिलेशन किसी को पता चले इसलिए हम दोनों एक दूसरे से छुपके मिला करते थे मुझे तो आशा के घर के बारे में भी नहीं पता था। जब मैंने अपने दोस्त से आशा के बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया कि उसकी मुलाकात भी उसके किसी दोस्त ने आशा से करवाई थी लेकिन अब इस बारे में जानने का कोई भी फायदा नहीं था ना तो आशा के बारे में जानने का कोई फायदा था और ना ही मैं इस बारे में कुछ जानना चाहता था। मेरी जिंदगी में आशा की वजह से जो नुकसान हुआ था उसकी भरपाई कर पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल था और मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि आखिर ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए। इस वजह से मेरी जिंदगी में काफी ज्यादा प्रभाव पड़ा और मैं बहुत ही मुश्किलों से गुजर रहा था लेकिन मेरी जिंदगी में अभी भी कुछ ठीक नहीं हुआ था मैंने अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया था। मैं काफी समय तक तो घर पर ही था काफी समय तक घर पर रहने के बाद जब पापा और मम्मी ने मुझसे इस बारे में पूछा कि बेटा तुम कहीं जॉब क्यों नहीं कर रहे हो तो मैंने उन्हें कहा कि मैं थोड़े टाइम बाद जॉब करूंगा अभी मेरा कहीं भी मन नहीं लग रहा है।

पापा मम्मी को शायद इस बात का पता चल चुका था इसलिए वह लोग मेरे लिए लड़की तलाशने लगे वह लोग चाहते थे कि मैं शादी कर लूं। उन्होंने मुझे अपने दोस्त की बेटी से भी मिलवाया लेकिन वह मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई और ना ही मेरा मन उससे शादी करने का था। मैं फिलहाल इस बारे में सोच ही नहीं रहा था मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मुझे करना क्या चाहिए। धीरे धीरे सब कुछ सामान्य होता चला गया और मैंने एक कंपनी में जॉब करनी शुरू कर दी, उस कम्पनी में मैं जॉब करने लगा था और सब कुछ ठीक चल रहा था। एक दिन मुझे आशा के बारे में पता चला जब मुझे आशा के बारे में पता चला तो मैं सोचने लगा कि मुझे आशा से बात करनी चाहिए या नहीं। मैंने उसे फोन करने की सोची जब मैंने आशा को फोन किया तो आशा ने मुझे कहा कि रोहित मुझे माफ कर दो अब मैं शादी कर चुकी हूं और मैं नहीं चाहती थी कि तुम्हें इस बारे में पता चले इसलिए मैंने अपनी शादी के बारे मे तुम्हे नही बताया और अब मैं तुमसे कभी भी बात नहीं कर पाऊंगी। मैंने आशा से कहा लेकिन तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मैं अपनी इस बात का जवाब चाहता था लेकिन आशा के पास कोई भी जवाब नहीं था उसने तो मेरी जिंदगी के साथ सिर्फ खिलवाड़ ही किया था। उसे इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था लेकिन अब मैंने भी अपनी जॉब पर पूरी तरीके से ध्यान देना शुरू किया और जल्द ही मेरा प्रमोशन भी हो गया। मेरा प्रमोशन हो जाने के बाद मैं अब सिर्फ अपने काम पर ही ध्यान दे रहा था पापा और मम्मी ने मुझसे कई बार कहा कि बेटा तुम शादी कर लो लेकिन मैं अभी शादी नहीं करना चाहता था। एक दिन जब मैं अपने घर से निकला तो उस दिन मेरी मोटरसाइकिल का टायर पंचर हो गया जिससे कि मुझे ऑफिस जाने के लिए देर हो गई और मैं अपने ऑफिस देरी से पहुंचा। जब मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन मेरे बॉस ने मुझसे इस बारे में पूछा तो मैंने उन्हें बताया कि मेरी मोटरसाइकिल का टायर पंचर हो गया था जिस कारण मुझे आने में देर हो गई।

उन्होंने मुझे कहा कोई बात नहीं उसके बाद मैं अपना काम करने लगा और शाम के वक्त मैं घर लौट आया था। हमारे पड़ोस में एक भाभी रहती है। जिनका नाम संजना है वह कुछ दिनों पहले ही हमारे पड़ोस में रहने के लिए आई थी उन्हें देखकर मुझे ऐसा लगता जैसे वह मुझसे बात करने के लिए उतावली रहती है। एक दिन उन्होने मुझसे बात की। जब उन्होंने मुझसे बात की तो मैं भी उनसे बात करने लगा मुझे उनसे बात कर के अच्छा लगता। हम दोनों की बातें अक्सर होने लगी थी लेकिन उनकी नजरों में तो कुछ और ही था वह चाहती थी वह मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए। मैं संजना भाभी के साथ सेक्स करने के लिए तैयार था एक दिन उन्होने मुझे अपने घर बुला लिया। उसके बाद वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुकी थी। मैंने संजना भाभी के हाथों को पकड़ा मै उनके हाथों को सहलाने लगा था। अब उनके अंदर की गर्मी बाहर की तरफ निकलने लगी थी। मुझे अब एहसास होने लगा था वह बहुत ही तड़पने लगी थी। मैंने जब संजना भाभी को अपनी बाहों में लिया तो वह गर्म होने लगी थी। उनके अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने भाभी के उसके नरम गुलाबी  होंठों को चूमना शुरू किया। मैं जब उनके होठों को चूमता तो वह भी तड़पने लगती।

भाभी अब बिस्तर पर लेट चुकी थी। मैं भाभी के ऊपर से लेटा हुआ था। मैंने उनके कपड़ों को उतारना शुरू किया अब मै उनके बदन से मैंने सारे कपड़े उतार चुका था। भाभी मेरे सामने नग्न अवस्था में थी। उनके नंगे बदन को देखकर मेरा लंड खडा हो गया था। मैं उनके नंगे बदन को देखे जा रहा था। मै उनके गोरे बदन को अब महसूस करना चाहता था। मैंने भाभी के स्तनों को दबाना शुरू किया  मुझे बडे स्तनो को दबाना शुरु किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था। मैं उन्हें अपने मुंह में लेकर चूसता तो वह उत्तेजित हो जाती। भाभी मुझे कहती मुझे मजा आ रहा है उनके अंदर की आग बहुत ही बढ़ चुकी थी और मेरे अंदर की आग भी अब पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। मैंने अपने मोटे लंड को बाहर निकाला तो उसे भाभी ने अपने मुंह में तुरंत ही लेना शुरू कर दिया था। वह जिस तरह से मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती तो मुझे मज़ा आता। भाभी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी उन्हे मेरे लंड को अपने मुंह में लेने में बहुत मजा आ रहा था। हम दोनों ही पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे। हम दोनों की उत्तेजना इस कदर बढ़ने लगी थी कि मैंने उन्हे कहा मैं तुम्हारी चूत को चाटना चाहता हूं। भाभी अपने पैरों को खोल चुकी थी। मैंने जब देखा उनकी चूत से पानी निकल रहा है तो मैं उनकी चूत को अच्छे से चाटने लगा था। मुझे अब बहुत अच्छा लगने लगा था। मैं जब उनकी चूत को चाट रहा था तो मेरे अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और थूक लगाने के बाद जब मैंने उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाई। अब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी वह मेरे अंदर की आग को बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैंने उनकी चूत के अंदर अपने लंड को तेजी से किया मुझे मजा आने लगा था। मैंने भाभी को बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए थे। मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा था और भाभी भी उत्तेजित हो गई थी। मेरे अंदर की आग अब चुकी थी उनके अंदर की आग भी अब बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। भाभी की चूत से पानी बाहर निकलने लगा था अब मेरे अंदर की गर्मी बहुत बढ़ाने लगी थी। मेरे लंड और उनकी चूत की रगडन से गर्मी पैदा हो रही थी वह एक अलग ही आग पैदा कर रही थी। हम दोनों ही एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा तड़पने लगे थे।

मेरा लंड भाभी की चूत की गर्मी को ज्यादा देर तक झेल नहीं पाया और मैंने अपने माल को उनकी चूत में गिरा दिया। जब मैंने अपने वीर्य को भाभी की चूत के गिराया तो वह खुश हो गई थी। मै अब अपने घर लौट आया था।  संजना भाभी के पति जब भी घर से बाहर होते तो भाभी मुझे घर पर बुला लिया करती और हम दोनों जब भी साथ होते तो एक दूसरे के साथ शारीरिक सुख का जमकर मजा लिया करते। हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगता था जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते। मैं संजना भाभी के साथ बहुत ही खुश होता था और उनकी चूत मारने में तो मुझे अलग ही मजा आता। मुझे उनकी चूत मारने की अब आदत हो चुकी थी।

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