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आओ आज सेक्स कर लो

Hindi sex kahani, antarvasna मैं कोलकाता का रहने वाला हूं मेरे पिताजी एक प्राइवेट कंपनी में एक अच्छे पद पर थे लेकिन उनके जीवन में कुछ मुसीबतें आ गई जिसकी वजह से वह बहुत ज्यादा परेशान रहने लगे। वह ज्यादा किसी से भी बात नहीं किया करते थे और उन्होंने अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी मैं इस बात से बहुत परेशान था और मैंने कई बार सोचा कि पापा ने ऐसा क्यों किया लेकिन मुझे इस बारे में बात करने की हिम्मत ही नहीं होती थी और मैंने भी कभी इस बारे में नही पूछा। उनकी नौकरी छोड़ने के बाद घर में कई समस्याएं आ गई मम्मी भी बहुत परेशान रहने लगी। मैंने एक दिन मम्मी से पूछा आप इतनी परेशान क्यों है तो उन्होंने मुझे सारी बात बताई और कहने लगी तुम्हारे पापा ने जब से नौकरी छोड़ दी तब से बहुत सारी समस्याएं आन पड़ी है अंकित बेटा तुम्हे ही कुछ करना पड़ेगा।

मैंने मम्मी से पूछा लेकिन पापा ने नौकरी क्यों छोड़ी तो मम्मी ने बताया कि वह जिस नौकरी में काम कर रहे थे वहां पर कोई बड़ी दुर्घटना हो गई जिससे की उन्हें बहुत तकलीफ पहुंची और उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। पापा इस बात से बहुत दुखी थे मुझे समझ आ गया कि मुझे कुछ करना पड़ेगा इसलिए मैं अब नौकरी की तलाश करने लगा। मैं एक शोरूम में जॉब करने लगा जिससे कि घर में थोड़ा बहुत पैसा आ जाया करते थे और घर का खर्चा भी चलने लगा था लेकिन उससे भी घर का खर्चा कब तक चलता सैलरी भी ज्यादा नहीं थी। एक बार पापा ने मुझे अपने पास बैठने के लिए कहा और बोला अंकित बेटा मैंने पापा से कहा हां पापा कहिए मैं वह कहने लगे देखो बेटा मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे ऊपर बेवजह का दबाव पड़े मैंने तुम्हें में नौकरी करने के लिए तो नहीं कहा। मैंने पापा से कहा ऐसी कोई बात नहीं है मेरा मन हुआ तो मैं नौकरी करने लगा वह मुझे कहने लगे बेटा देखो तुम उन सब चीजों के बारे में भी ना ही सोचो तो ठीक रहेगा तुम अपने ऊपर ध्यान दो।

पापा ने उस दिन मुझे बहुत समझाया और कहा कि तुम्हें काम करने की आवश्यकता नहीं है पापा कहने लगे कि मैंने दूसरी जगह जॉब के लिए अप्लाई किया है और जैसे ही वहां जॉब के लिए हो जाता है तो उसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी मैं खुद ही संभाल लूंगा। मैं नहीं चाहता था कि पापा अब नौकरी करें मैंने काफी मेहनत की और उसके बाद मेरी कंपनी में जॉब लग गई मैंने अपने पापा को साफ तौर पर मना कर दिया था कि आप को जॉब करने की आवश्यकता नहीं है और फिर उन्होंने उसके बाद जॉब नहीं की। मैं जिस कंपनी में जॉब करता था वहां पर मेरी मुलाकात माधुरी के साथ हुई माधुरी से जब मैं पहली बार मिला तो मुझे ऐसा लगा कि शायद वह बहुत ही एटीट्यूड में रहती है उसके अंदर बहुत ज्यादा घमंड है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह बहुत ही सिंपल सी थी। मुझे इस बात का पता तब चला जब मैं माधुरी से बात करने लगा क्योंकि एक दो मुलाकात में किसी के बारे में भी भांप लेना शायद गलत है और मैंने भी वही किया था। मैं माधुरी के बारे में अपने दिमाग में कुछ और ही खयाल पाल बैठा था लेकिन अब मैं माधुरी को समझने लगा था और माधुरी भी मुझसे बात करती थी माधुरी और मैंने लगभग एक साथ ही ऑफिस जॉइन किया था। एक दिन मैंने माधुरी को अपने घर के बारे में बताया तो माधुरी ने मुझे कहा तुमने अच्छा किया जो अपने पापा की तुमने मदद की ऐसी स्थिति में यदि मैं होती तो शायद मैं भी वही करती। माधुरी ने मुझे कहा तुम बहुत ही अच्छे हो हम दोनों ही एक दूसरे से अच्छे से बात किया करते हैं माधुरी मुझे हमेशा ही समझाती रहती थी। कुछ समय बाद माधुरी के पिताजी की भी तबीयत खराब हो गई माधुरी कुछ दिन से ऑफिस नहीं आ रही थी मैंने माधुरी को फोन किया तो मुझे मालूम चला कि उसके पापा की तबीयत खराब है। मैंने माधुरी से कहा मैं तुमसे मिलने के लिए आ रहा हूं माधुरी कहने लगी कि कोई बात नहीं तुम रहने दो लेकिन मैं उससे मिलने के लिए चला गया। मैं जब माधुरी से मिलने के लिए गया तो मैंने उसे पूछा तम कहां हो तो वह कहने लगी मैं तो अस्पताल में हूं। पहले मैं उसके घर पर चला गया था क्योंकि एक बार मैंने उसे उसके घर पर छोड़ा था इसलिए मुझे उसके घर का रास्ता मालूम था लेकिन जब उसने मुझे बताया कि मैं अस्पताल में हूं तो मैंने उसे कहा तुम मुझे हॉस्पिटल का एड्रेस भेज दो मैं वहां पहुंच जाता हूं।

मैं हॉस्पिटल में चला गया मैं जब हॉस्पिटल में गया तो माधुरी के साथ वहां पर उसके और भी कुछ रिलेटिव थे मैंने माधुरी से कहा मैं हॉस्पिटल आ चुका हूं। माधुरी मुझे हॉस्पिटल के रिसेप्शन में लेने के लिए आई और जब मैं उसके पापा से मिला तो मैंने देखा उसके पापा की काफी तबीयत खराब थी वह किसी से बात भी नहीं कर पा रहे थे इसलिए मैंने उनसे ज्यादा बात नहीं की लेकिन मैंने माधुरी की मम्मी से बात की और उन्हें समझाया। वह मुझे कहने लगे तुम बहुत ही समझदार हो मैं माधुरी की मम्मी से पहली बार ही मिला था लेकिन उनसे बात कर के मुझे अच्छा लगा मैंने माधुरी की मम्मी से काफी देर तक बात की। उसके बाद मैं वापस अपने घर चला आया लेकिन कुछ दिनों बाद माधुरी के पिता का देहांत हो गया जब उनका देहांत हुआ तो माधुरी इस बात से पूरी तरीके से टूट चुकी थी और उस वक्त मैं माधुरी से मिलने के लिए भी गया। जब मैं माधुरी से मिलने गया तो मैंने उसे समझाया और कहा तुम चिंता मत करो। मैंने माधुरी को बहुत सपोर्ट किया धीरे धीरे माधुरी भी ठीक होने लगी थी और अब वह ऑफिस जाने लगी थी और सब कुछ ठीक होने लगा था। मैं माधुरी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करता लेकिन उस वक्त मैंने माधुरी का बहुत सपोर्ट किया और शायद उसे मेरी यही बात अच्छी लगी। वह मुझ पर बहुत भरोसा करने लगी थी और इसी वजह से हम दोनों के बीच में नजदीकियां बढ़ती चली गई।

एक दिन माधुरी की मम्मी ने मुझे कहा कि तुम माधुरी के लिए बिल्कुल सही हो और तुम माधुरी का ध्यान रख सकते हो लेकिन मैं नहीं चाहता था कि मैं माधुरी से शादी करूं। मुझे कुछ और समय चाहिए था इसलिए माधुरी और मैं साथ में समय बिताया करते हम दोनों एक दूसरे का बहुत ध्यान रखते थे माधुरी भी अब अपने पिताजी की मौत के सदमे से ऊभर चुकी थी। माधुरी और मैं एक दिन लंच टाइम में साथ में बैठे हुए थे तो माधुरी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा अंकित तुम ने मेरा बहुत साथ दिया है। मैं माधुरी की आंखों में देख रहा था तो मुझे उस वक्त एहसास हुआ कि माधुरी को किसी का साथ चाहिए इसलिए मैं माधुरी को अपना साथ देना चाहता था और मैंने माधुरी से शादी करने के बारे में सोच लिया था। हम दोनों ने सगाई करने का फैसला कर लिया मैंने अपने माता-पिता से बात की और उन्होंने मेरी सगाई माधुरी से करवा दी। सब लोग बहुत खुश थे और मुझे भी इस बात की खुशी थी कि कम से कम मेरा रिश्ता माधुरी से तो हो रहा है क्योंकि माधुरी बहुत अच्छी लड़की है और उसके जैसी लड़की शायद मुझे मिल ही नहीं पाती। हम दोनों ही इस रिश्ते से बहुत खुश थे और हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करते हैं मुझे माधुरी के साथ समय बिताना अच्छा लगता था और उसे भी मेरे साथ में बहुत अच्छा लगता है। मेरी और माधुरी की सगाई हो चुकी थी हम दोनों अब एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते।

मैं माधुरी का साथ हमेशा दिया करता उसी दौरान मेरी और माधुरी के बीच एक दिन फोन पर कुछ ज्यादा ही अश्लील बातें हो गई। हम दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गए माधुरी मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार थी मैंने भी माधुरी के साथ सेक्स करने की ठान ली थी। उसी दिन मैं माधुरी से मिलने उसके घर पर गया वह घर पर अकेली थी। मैंने माधुरी से कहा मम्मी आज दिखाई नहीं दे रही तो वह कहने लगी वह कहीं बाहर गई हुई है मैं माधुरी के बगल में बैठा हुआ था। मैंने माधुरी की जांघ को सहलाना शुरु किया तो हम दोनों के अंदर से गर्मी निकलने लगी और हम दोनों ही पूरी तरीके से उत्तेजित हो गए। मैंने माधुरी के रसीले होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया उसे मजा आने लगा और मुझे भी मज़ा आ रहा था। मैंने काफी देर तक उसके होठों का रसपान किया हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाए मैंने माधुरी के बदन से सारे कपड़े उतार दिए थे मैंने जब उसके बदन से कपडे उतारे तो वह भी उत्तेजित हो गई और मेरे होठों को चूमने लगी।

उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था मैंने उसके स्तनों का रसपान किया, जब मैंने उसके गोरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो वह जोश में आ गई और मुझे भी एक अलग ही जोश पैदा होने लगा। मैंने जब अपने लंड को निकाला तो माधुरी ने उसे अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी उसने बड़े अच्छे से मेरे लंड का रसपान किया, उसने करीब 1 मिनट तक मेरे लंड का रसपान किया। मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो उसके मुंह से मादक आवाज निकलती और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती। मेरे अंदर भी एक अलग ही जोश पैदा हो जाता और मैं उसे तेजी से धक्के दिया करता मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसके साथ काफी देर तक संभोग किया जब हम दोनों पूरी तरीके से संतुष्ट हो गए तो मैंने अपने वीर्य को माधुरी की योनि के अंदर गिरा दिया। हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, हम दोनों ने कुछ समय बाद शादी करने के बारे में सोच लिया है लेकिन उसी दौरान माधुरी भी प्रेग्नेंट हो गई क्योंकि हम दोनों के बीच कई बार सेक्स हो चुका था इसलिए मैंने सोचा कि मैं माधुरी से शादी कर लूं और कुछ समय बाद हम दोनों ने शादी कर ली मधुरी अब मेरी पत्नी है और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं।

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