Best Hindi sex stories

Sab se achi Indian Hindi sex kahaniya!

आँचल की योनि को चाटा

Antarvasna, hindi sex kahani: मुझे गुड़गांव आए हुए अभी कुछ समय ही हुआ था और मैं गुड़गांव में एक अच्छी कंपनी में नौकरी करता हूं। मैं अपने दोस्त सोहन के साथ गुडगांव में रहता हूं और सोहन भी एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है। हम दोनों ने एक दूसरे को 10 वर्षों से जानते हैं सोहन का परिवार चंडीगढ़ में मेरे घर के पास ही रहता है इसलिए सोहन की फैमिली को मैं बहुत अच्छे से पहचानता हूं। मेरी नौकरी बड़ी ही अच्छे तरीके से चल रही है और मैं काफी खुश हूं जिस तरीके से मेरी नौकरी चल रही है। एक दिन मैं और सोहन साथ में थे उस दिन हम दोनों ने सोचा कि क्यों ना आज कहीं घूमने के लिए चलें क्योंकि हम दोनों की छुट्टी थी और हम दोनों उस दिन कहीं बाहर जाना चाहते थे। हम दोनों उस दिन हमारे घर के पास ही शॉपिंग मॉल है वहां पर चले गए क्योंकि मुझे कुछ कपड़े भी लेने थे इसलिए मैंने उस दिन थोड़ी बहुत शॉपिंग भी कर ली। शॉपिंग करने के बाद मैं जब घर वापस लौटा तो मैं उस दिन सोहन से बातें कर रहा था।

सोहन और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो सोहन ने मुझे बताया कि उसकी बहन के लिए रिश्ते आना शुरू हो चुके हैं। सोहन की बहन काजल जो की उम्र में मुझसे दो वर्ष के आसपास छोटी होगी और जब सोहन ने मुझे इस बारे में बताया तो मैंने सोहन को कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है। काजल चंडीगढ़ में ही जॉब करती है और उस दिन हम दोनों की बातें काफी देर तक हुई। अगले दिन हम दोनों को ऑफिस जाना था इसलिए अब हम दोनों सोने की तैयारी करने लगे और अगले दिन सुबह हम दोनों ऑफिस के लिए निकल गए। जब मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो  मुझे उस दिन ऑफिस में काफी ज्यादा काम था। मैं अपना काम खत्म करने के बाद जब वापस घर लौटा तो उस दिन सोहन ने मुझे बताया कि आज वह घर नहीं आ रहा है। मैंने सोहन को कहा कि लेकिन आज तुम क्यों घर नहीं आ रहे हो तो उसने मुझे बताया कि वह अपने किसी दोस्त के घर जा रहा है। मैंने सोहन को कहा कि चलो कोई बात नहीं। मैं उस दिन घर पर अकेला ही था और मैंने सोचा भी नहीं था कि उस दिन मेरी बात आंचल के साथ हो जाएगी।

उस दिन मेरी बात आंचल से हुई आंचल ने मुझे उस दिन फोन किया और उसने मुझे बताया कि वह भी गुडगांव में ही जॉब करने लगी है। आंचल मेरे साथ कॉलेज में पढ़ा करती थी मेरी और आंचल की बहुत अच्छी दोस्ती है। काफी समय से हम दोनों की बातें नहीं हो पाई थी लेकिन उस दिन जब हम दोनों की बातें हुई तो हम दोनों को ही अच्छा लगा। मैंने आंचल से कहा कि यह तो बड़ी ही अच्छी बात है कि तुम गुडगांव में ही जॉब करने लगी हो। मैं अब आंचल से मिलना चाहता था और मैंने जब रविवार के दिन आंचल को फोन किया तो मैं आंचल से मिलने के लिए चला गया। मैं जब आंचल को मिला तो मुझे उस दिन बड़ा ही अच्छा लगा आंचल ने मुझसे मेरा हालचाल पूछा और मैंने भी आंचल से उसका हालचाल पूछा। मुझे आँचल से मिलकर काफी अच्छा लगा और मैं बहुत ज्यादा खुश था। हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया मैं और आंचल काफी ज्यादा खुश थे आँचल से मिलने के बाद मैं वापस अपने घर लौट आया था।

जब मैं वापस लौटा तो उस दिन सोहन भी घर पर आ चुका था और सोहन ने मुझसे पूछा कि तुम कहां थे तो मैंने सोहन को बताया कि मैं आंचल से मिलने के लिए गया हुआ था। सोहन भी आँचल को पहचानता है इस वजह से उसने मुझे कहा कि क्या तुम आंचल से मिले थे तो मैंने सोहन को कहा कि हां मैं आंचल से मिला था। सोहन ने मुझे पूछा कि क्या आंचल गुड़गांव कुछ काम से आई हुई है तो मैंने सोहन को बताया कि नहीं आँचल गुडगांव में ही नौकरी करती है। मेरा मिलना तो हर रोज आंचल के साथ हो ही जाता था  मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब मैं और आंचल एक दूसरे से मुलाकात करते और हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता था। मुझे नहीं मालूम था कि हम दोनों के बीच में प्यार भी पनपने लगेगा। मैं और आँचल एक दूसरे से बहुत मिलने लगे थे और हम दोनों के बीच का प्यारा बढ़ता ही जा रहा था। मैंने ही आंचल को अपने दिल की बात कही थी। जब आंचल से मैंने अपने दिल की बात कही तो उसके बाद से आंचल और मेरा रिलेशन बड़े ही अच्छे से चलने लगा और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश है।

जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा है और हम दोनों एक दूसरे के साथ जब भी समय बिताते हैं तो हमें बहुत ही अच्छा लगता है। समय के साथ साथ आँचल और मैं एक दूसरे के और भी ज्यादा करीब आते चले गए थे। हम दोनों गुड़गांव में ही रहते हैं इसलिए हम दोनों का मिलना तो अक्सर हो ही जाता था। एक दिन मैं अपने ऑफिस से लौट रहा था तो उस दिन आंचल ने मुझसे मिलने के लिए कहा। काफी दिन हो गए थे मैं आंचल को मिला भी नहीं था तो सोचा कि चलो आज आंचल को मिल लेता हूं। उस दिन जब मैं आंचल से मिला तो मुझे आंचल से मिलकर बड़ा ही अच्छा लगा। आंचल ने मुझे कहा कि वह कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ जा रही है मैंने आँचल को कहा कि क्या तुम चंडीगढ़ किसी जरूरी काम से जा रही हो। आंचल मुझे कहा कि नहीं मुझे पापा मम्मी से मिले काफी समय हो गया है तो सोचा कि उन लोगों से मुलाकात कर लूं और उन लोगों से मुझे मिलना भी था। मैंने भी आंचल से कहा कि क्या मैं भी कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले लूं तो आंचल ने कहा कि ठीक है अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हें अपने ऑफिस से छुट्टी लेनी चाहिए तो तुम ऑफिस से छुट्टी ले लो। मैंने उस दिन आंचल से कहा कि हम दोनों चंडीगढ़ साथ में चलेंगे और फिर हम दोनों चंडीगढ़ साथ में ही गए।

मैंने अपने ऑफिस से कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले ली थी और मैं जब आंचल के साथ चंडीगढ़ गया तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगा। हम दोनों वहां पर कुछ दिनों तक रुके उसके बाद फिर हम दोनों वापस लौट आए। आंचल और मेरे बीच का प्यार तो दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा था और हम दोनों को बहुत अच्छा लगता है जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं। हमे एक दूसरे के साथ में रहकर बहुत ही ज्यादा खुशी होती है। आंचल भी बहुत ज्यादा खुश रहती है जब भी वह मेरे साथ होती है। आंचल मुझसे कई बार मिलने के लिए फ्लैट में आती है। जब भी वह मुझसे मिलती तो मुझे अच्छा लगता। एक दिन हम दोनों मिले तो उस दिन मैंने आंचल से कहा आज तुम बहुत ज्यादा सुंदर लग रही हो। आंचल उस दिन बहुत ज्यादा सुंदर लग रही थी मैंने उसके होठों को चूम लिया। हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूस कर एक दूसरे की गर्मी को बढा रहे थे। हम दोनों से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। मैंने आंचल से कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। वह बहुत ही ज्यादा तड़पने लगी थी अब हमारी तडप बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। आंचल ने अपने पैरों को खोल लिया जब आंचल ने अपने पैरों को खोला तो मैंने अपने हाथ को उसकी जांघ पर लगा दिया। आंचल ने कपड़े पहने हुए थे मैंने उसके कपड़ों को उतारा। जब वह मेरे सामने नग्न अवस्था में थी तो मैंने आंचल के दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और उसकी पैंटी को उतार दिया।

मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु किया हम दोनों को ही मजा आने लगा था। मैं आंचल की गर्मी को बढ़ाए जा रहा था वह पूरी तरीके से गर्म हो गई थी और मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है हम दोनों को ही मजा आने लगा था। जिस तरीके से हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे उससे हम दोनों का बड़ा मजा आने लगा था और मैं बिल्कुल भी रह ना सका। कुछ देर तक आंचल के स्तनों का रसपान करने के बाद जैसे ही मैंने आंचल की योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा। मैंने आंचल की चूत मे अपने लंड को घुसा दिया था उसकी योनि में मेरा लंड जा चुका था। उसकी चूत से खून की पिचकारी निकल चुकी थी वह मेरी बाहों में थी। मैं आंचल को तेज गति से धक्के दिए जा रहा था आंचल बहुत ज्यादा खुश थी।

हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही खुश थे। हम दोनों को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाए। मैंने अपने माल को आंचल की णूत मे गिरा दिया था। मैंने उसे घोडी बनाने के बाद दोबारा से चोदना शुरू किया। जब मैं उसे चोदने लगा तो मुझे मजा आने लगा और उसे भी मजा आ रहा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही खुश थे। जिस तरीके से हम लोगों ने शारीरिक संबंध बनाए थे उससे हम दोनों का बड़ा ही अच्छा लगा था। हम दोनों जब भी एक दूसरे से मिलते तो एक दूसरे की गर्मी को शांत कर दिया करते। हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे खुश थे हम दोनों के बीच ना जाने कितनी ही बार शारीरिक संबंध बनते रहते है।

Best Hindi sex stories © 2020